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बकरीद के पहले बंगाल इमाम संगठन ने मुसलमानों से की ये अपील, बीजेपी ने किया पलटवार

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West Bengal Imam Affiliation: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बंगाल इमाम एसोसिएशन (Bengal Imams Associations and Welfare Accept as true with) ने मुसलमानों (Muslims) को एहतियात  के तौर पर किसी भी अनजान व्यक्ति को मांस बेचने से मना किया है. ये प्रतिबंध बकरीद के मद्देनजर लगाए गए हैं. यही नहीं एसोशिएशन ने फेसबुक, इंस्टाग्राम पर किसी भी तरह की तस्वीरें भी पोस्ट करने से मना किया है. ये कदम उदयपुर (Udaipur Homicide Case) की घटना के बाद उठाए जा रहे हैं और इसका सीधा आरोप BJP पर लग रहा है.

बंगाल इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याह्या ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि आने वाली 10 जुलाई को हमारे यहां ईद-उल-जुहा का त्योहार मनाया जाएगा. मैं पश्चिम बंगाल के मुस्लिम समुदाय से इस मामले में सतर्क रहने का अनुरोध करना चाहता हूं. भारत में वर्तमान स्थिति के रूप में एक विशेष पार्टी देश की शांति को नष्ट करने की कोशिश करती रहती है. सबसे अच्छा उदाहरण राजस्थान के उदयपुर में महज 2-3 दिन पहले की घटना है. जिस व्यक्ति पर हमला किया गया है वह उस पार्टी का सदस्य था और जिसने उसे मारा वह भी उसी पार्टी का सदस्य है. 

अपनी अपील में क्या बोले इमाम?
उन्होंने खुद योजना बनाई और अब वो पूरे देश में रैलियां और सभाएं कर रहे हैं. हमें सतर्क रहना होगा और यह बहुत महत्वपूर्ण है. उनकी साजिश नहीं चलेगी. कुर्बानी वाले लोगों से मेरी गुजारिश है कि किसी अंजान व्यक्ति को मांस न दें और यदि आप उनको मांस देते हैं तो उसकी एक तस्वीर क्लिक करना सुनिश्चित करें और उस व्यक्ति का विवरण भी लें. मांस लेकर इधर-उधर यात्रा न करें और किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानवरों की तस्वीरें अपलोड न करें. इस तरह के फोटो और वीडियो अपलोड करने वाले लोग अल्लाह की नजर में पापी है.

किसी को भी नहीं है शांति छीनने का हक
उन्होंने कहा कि जो लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं उनसे अनुरोध है कि वे अपने फ़ीड में किसी भी जानवर की कोई तस्वीर नहीं डालें. मैं पुलिस अधिकारियों से इस तरह की हरकत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करूंगा. मैं आप सभी से सरकार और पुलिस अधिकारियों का सहयोग करने और बंगाल में शांतिपूर्ण सद्भाव बनाए रखने का अनुरोध करता हूं. किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार की तस्वीरें/वीडियो पोस्ट न करने दें जो उस क्षेत्र की शांति भंग करें. याद रखें किसी को भी किसी की भी शांति छीनने का हक नहीं है. 

बनाए रखें शांति – बंगाल इमाम एसोसिएशन अध्यक्ष
बंगाल में इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याह्या ने लोगों से बंगाल में शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस इलाके की शांति भंग करने का अधिकार किसी को भी नहीं है लोगों को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए. अगर आप लोगों के बोलने के बाद भी कोई ऐसा करे तो पुलिस के पास उसकी रिपोर्ट की जाए और उसकी तस्वीर पुलिस को दी जाए.

पश्चिम बंगाल में शांति बनाए रखने के लिए हम सभी को सावधान रहने की जरूरत है. हमारा फर्ज है कि प्रशासन का सहयोग करें. प्रशासन की तरफ से जहां-जहां जो सुविधाएं दी गई है उनका इस्तेमाल करें.  कूड़ा इधर-उधर नहीं फेंके. मेरा वीडियो जितना हो सके शेयर करें और लोगों तक मेरी बात पहुंचाएं और सबको सावधान करें. कोई भी किसी भी गलत व्यक्ति का साथ नहीं दे, पश्चिम बंगाल में शांति बनाए रखने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है.

भड़की हिंसा की कौन लेगा जिम्मेदार?
बंगाल बीजेपी प्रदेश युवा मोर्चा के नेता सौरव सिकंदर ने बंगाल इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि मोहम्मद याह्या के फतवे से राज्य में हिंसा भड़क सकती है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याह्या के फतवे से हिंसा भड़काने का अंदेशा जताया. सौरव ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी पूरे बंगाल की सीएम हैं, जो कानून पूरे देश में चलता है वही बंगाल में भी चलना चाहिए. पूरे भारत में जहां-जहां ऐसे भड़काऊ भाषण दिए गए वहां पर हिंसा भड़की. इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

ईद-उल-अधा को और किस नाम से जाना जाता है?
वहीं कलकत्ता खिलाफत कमेटी ने पुष्टी की है कि ईद-उल-अधा नमाज दो साल के अंतराल के बाद अदा की जाएगी. कोरोना के कारण रेड रोड पर ईद-उल-अधा नमाज रद्द कर दी गई थी. हालांकि, इस साल सीकेसी ने 10 जुलाई, 2022 को रेड रोड पर नमाज़ अदा करने के लिए सभी अधिकारियों से अनुमति प्राप्त कर ली है जबकि ईद-उल-अधा या बकरीद पवित्र रमजान महीने के ठीक दो महीने बाद आती है इसे बलिदान के पर्व के नाम से भी जाना जाता है.

कब शुरू होगी नमाज?
ईद-उल-अधा की नमाज सुबह 8.30 बजे शुरू होगी. कोरोना महामारी (Covid Pandemic) के पहले वर्षों के दौरान लगभग दो लाख मुसलमान ईद-उल-फितर और ईद-उल-अधा के अवसर पर विशेष प्रार्थना करने के लिए रेड रोड (इंदिरा गांधी सारणी) पर सबसे बड़ी सभा में इकट्ठा होते थे. सीकेसी ने 1920 में शाहिद मीनार मैदान में ईद-उल-फितर और ईद-उल-अधा की नमाज का आयोजन शुरू किया. जलजमाव के कारण 26 साल पहले कार्यक्रम स्थल को शहीद मीनार मैदान से रेड रोड पर स्थानांतरित कर दिया गया था.

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